2nd Marriage in Astrology: How to See It (Divorce Indicators, Venus/Jupiter, Mahadasha/Antardasha, Navamsa Tests)
2nd marriage in astrology | How to see 2nd Marriage in Astrology | Multiple affairs in astrology जब कुंडली में नवम भाव अथवा तृतीय भाव के स्वामी ग्रह की महादशा या अंतर्दशा चलती है, तब कभी-कभी द्वितीय विवाह की संभावना निर्मित होती है। परंतु केवल इन भावों की दशा के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। इसके लिए यह देखना भी अत्यंत आवश्यक है कि— क्या कुंडली में प्रथम विवाह का स्पष्ट योग विद्यमान है? क्या जीवनसाथी से पृथक्करण, वैवाहिक विच्छेद अथवा दांपत्य विघटन का योग है? सप्तम भाव, उसके स्वामी तथा पुरुष की कुंडली में शुक्र और स्त्री की कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कैसी है? क्या सप्तम भाव या उसके स्वामी पर पापग्रहों का प्रभाव है? क्या नवांश कुंडली (डी-9) में वैवाहिक जीवन में बाधा अथवा टूटन के संकेत प्राप्त होते हैं? अतः नवम या तृतीय भाव की दशा केवल एक संकेत प्रदान करती है; द्वितीय विवाह का स्पष्ट निर्णय तभी किया जा सकता है जब प्रथम विवाह में विघटन का सशक्त योग भी उपस्थित हो। ज्योतिष में किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पूर्व संपूर्ण कुंडली का सम्यक् एवं व्यापक विश्लेषण करना अनिवार्य है। Contact details for Anil Kumar Sir: YouTube: / @anilkumarsinghastro Contact: 8882355905 #Astrology_Myths #Anil_Kumar_singh








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