Unlocking the Secrets of Saturn in the Ninth House - Lal Kitab Astrology EP80
लाल किताब 1941 की विवेचन शृंखला का ये मेरा इक्यासीवां वीडियो है। इसमे मैंने “शनि खाना नंबर 9” (जब कुंडली के नौवे घर मे शनि स्थित हो) के बारे मे विश्लेषण करने का प्रयास किया है। लाल किताब के खाना नम्बर 9 को भाग्य विधाता कहा जाता है. इसे लाल किताब में किस्मत की कहानी कहते हैं. इस घर का स्वामी और कारक दोनों ही बृहस्पति हैं. लाल किताब में इस स्थान को गुरू की गद्दी कहा गया है. नौंवा घर कर्मों का विशाल सागर कहा गया है. नवम घर और दूसरे घर के मध्य एक गहरा संबंध होता है. जब नौंवा घर सोया हुआ हो तो दूसरे घर के माध्यम से उसे जगाया जा सकता है. पर इस स्थित के लिए तिसरे घर और पांचवें घर को खाली होना चाहिए. सोया हुआ ग्रह जब नौवें घर में आता है तो वह जाग उठता है और अपने भाग्य से संबंधित फलों को देने की कोशिश करता है. ऎसी स्थिति में सूर्य और चंद्रमा सदैव शुभ फल देने वाले बनते हैं. राहु केतु भी बुरा प्रभाव नहीं देते इस घर के बुरे प्रभावों से बचने के लिए नौवें घर के ग्रहों की वस्तुओं को माथे से लगाना चाहिए. जातक के तीन घर होंगे। जातक एक सफल यात्रा संचालक (टूर ऑपरेटर) या सिविल इंजीनियर होगा। वह एक लंबे और सुखी जीवन का आनंद लेगा साथ ही जातक के माता - पिता भी सुखी जीवन का आनंद लेंगे। यहां स्थित शनि जातक की तीन पीढ़ियों शनि के दुष्प्रभाव से बचाएगा। अगर जातक दूसरों की मदद करता है तो शनि ग्रह हमेशा अच्छे परिणाम देगा। जातक के एक बेटा होगा, हालांकि वह देर से पैदा होगा। ये विवेचना लाल किताब ज्योतिषियों के अलावा, भृगु नंदी नाड़ी ज्योतिषियों और वैदिक (पाराशर) ज्योतिषियों के लिए भी उपयोगी हो सकती है। वीडियो के बारें मे अपनी प्रतिक्रिया से अवगत अवश्य कराएं। लाल किताब 1941 का विस्तृत वॉल्यूम PDF फॉर्मेट मे प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप्प (+9180030









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